मूर्ख ऊंट की कहानी | sher aur oont ki kahani

परिचय

यह कहानी जंगल के जानवरों के बीच की है, जो बुद्धिमानी, धूर्तता और विश्वास की महत्वपूर्ण सीख देती है। इस कहानी में एक शेर और उसके साथी जानवरों के साथ एक ऊंट का प्रसंग है, जो हमें सिखाता है कि किसी भी परिस्थिति में हमें सावधान रहना चाहिए और बिना सोचे-समझे किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।

चालाक जानवरों और भोले ऊंट की कहानी

किसी घने जंगल में एक खतरनाक शेर रहता था। उसके साथ कौआ, सियार और चीता उसके सेवक के रूप में रहते थे। शेर रोज शिकार करता और बाकी जानवर उसके बचे हुए शिकार से अपना पेट भरते थे।

एक दिन एक ऊंट उस जंगल में आ गया, जो अपने झुंड से बिछड़ गया था। शेर ने कभी ऊंट नहीं देखा था। कौवे ने शेर को बताया कि यह ऊंट है और यह यहां का जानवर नहीं है, शायद यह पास के गांव से भटककर यहां आ गया है। कौवे, सियार और चीते ने शेर को ऊंट का शिकार करने की सलाह दी।

शेर ने कहा, “नहीं, यह हमारा मेहमान है। मैं इसका शिकार नहीं करूंगा।” शेर ऊंट के पास गया और उससे उसकी कहानी सुनी। शेर को उस पर दया आई और उसने ऊंट को अपने साथ जंगल में रहने की अनुमति दे दी। कौवे, सियार और चीते को यह बात पसंद नहीं आई, लेकिन वे कुछ नहीं कह सके।

ऊंट जंगल में रहने लगा और जल्दी ही तंदुरुस्त हो गया। कुछ दिनों बाद, शेर का एक जंगली हाथी से मुकाबला हो गया और शेर बुरी तरह घायल हो गया। वह शिकार करने में असमर्थ हो गया, जिससे कौआ, सियार और चीता भी भूखे रहने लगे।

कई दिनों बाद, सियार ने शेर से कहा, “महाराज, आप बहुत कमजोर हो गए हैं। अगर आपने शिकार नहीं किया, तो हालत और खराब हो जाएगी।” शेर ने उत्तर दिया, “मैं अब शिकार नहीं कर सकता। अगर तुम किसी जानवर को यहां ला सकते हो, तो मैं उसका शिकार कर सकता हूं।”

सियार ने सुझाव दिया, “महाराज, हम ऊंट को ला सकते हैं। आप उसका शिकार कर सकते हैं।” शेर को गुस्सा आया और उसने कहा, “वह हमारा मेहमान है। उसका शिकार मैं नहीं करूंगा।”

सियार ने पूछा, “महाराज, अगर वह स्वयं अपने आपको समर्पित कर दे, तो?” शेर ने कहा, “तब मैं उसे खा सकता हूं।”

सियार, कौआ और चीते ने मिलकर एक योजना बनाई। वे ऊंट के पास गए और उसे बोले, “महाराज बहुत कमजोर हो गए हैं। उन्होंने कई दिनों से कुछ नहीं खाया है। हम सब अपने आपको समर्पित करने को तैयार हैं।”

चारों शेर के पास गए और सबसे पहले कौआ ने कहा, “महाराज, आप मुझे खा लीजिए।” शेर ने उसे मना कर दिया। फिर सियार ने कहा, “महाराज, आप मुझे खा लीजिए।” शेर ने उसे भी मना कर दिया। फिर चीते ने कहा, “महाराज, आप मुझे खा लीजिए।” शेर ने उसे भी मना कर दिया।

अब ऊंट ने सोचा, “शायद महाराज मुझे भी नहीं खाएंगे, क्योंकि मैं उनका मेहमान हूं।” वह बोला, “महाराज, आप मुझे खा लीजिए।”

इतना सुनते ही शेर, चीता और सियार उस पर झपट पड़े और उसे मारकर खा गए।

मूर्ख ऊंट की कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें बिना सोचे-समझे किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए और चालाक लोगों की बातों में नहीं आना चाहिए। हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और अपनी बुद्धिमानी से सही निर्णय लेना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उत्तर

  1. प्रश्न: ऊंट जंगल में कैसे आया?
    उत्तर: ऊंट अपने झुंड से बिछड़कर जंगल में आ गया था।
  2. प्रश्न: शेर ने ऊंट को क्यों नहीं मारा?
    उत्तर: शेर ने ऊंट को मेहमान माना और उसकी दया करके उसे नहीं मारा।
  3. प्रश्न: शेर घायल कैसे हुआ?
    उत्तर: शेर की एक जंगली हाथी से लड़ाई हो गई थी, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गया।
  4. प्रश्न: सियार ने शेर को किस जानवर का शिकार करने का सुझाव दिया?
    उत्तर: सियार ने शेर को ऊंट का शिकार करने का सुझाव दिया।
  5. प्रश्न: ऊंट की मौत कैसे हुई?
    उत्तर: ऊंट ने अपने आपको शेर के सामने समर्पित कर दिया, जिससे शेर, चीता और सियार ने मिलकर उसे मार दिया।

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