तेनाली रामा की कहानी: नली का कमाल | Nali Ka Kamaal Tenali Raman Story in Hindi

कहानियाँ केवल मनोरंजन के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे हमें महत्वपूर्ण जीवन के सबक भी सिखाती हैं। चतुराई, समझदारी और सहिष्णुता की कहानी अक्सर प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। ऐसी ही एक कहानी है राजा कृष्णदेव राय और तेनालीराम की, जो हमें यह सिखाती है कि सच्ची बुद्धिमत्ता और चतुराई किस तरह से हमें कठिन परिस्थितियों में मदद करती हैं। आइए, इस कहानी को पढ़ते हैं।

राजा कृष्णदेव राय और तेनालीराम की कहानी

एक समय की बात है, जब राजा कृष्णदेव राय अपने दरबार में अपने दरबारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। चर्चा के दौरान, विषय चतुराई पर आ गया। राजा के दरबार में कई दरबारी थे, जिनमें से कई तेनालीराम से ईर्ष्या करते थे। एक मंत्री ने राजा से कहा, “महाराज, हमारे दरबार में कई चतुर और बुद्धिमान लोग हैं, लेकिन तेनालीराम को हमेशा अपनी चतुराई साबित करने का मौका मिलता है।”

राजा कृष्णदेव राय ने पूछा, “तो क्या आप सब भी अपनी चतुराई दिखाना चाहते हैं?” इस पर सेनापति बोले, “महाराज, अगर हमें भी मौका मिले तो हम अपनी बुद्धिमानी साबित कर सकते हैं।”

राजा ने सोचा कि यह सभी दरबारियों की परीक्षा लेने का सही समय है। उन्होंने कहा, “ठीक है, आप सबको अपनी चतुराई दिखाने का मौका मिलेगा। लेकिन तेनालीराम बीच में नहीं आएगा।” सभी दरबारी खुश हो गए और बोले, “हमें बताइए कि हमें क्या करना होगा।”

राजा ने धूपबत्ती की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मेरे लिए दो हाथ धुआं लाओ। जो भी यह कर पाएगा, उसे तेनालीराम से ज्यादा बुद्धिमान माना जाएगा।”

सभी दरबारी सोच में पड़ गए कि यह कैसे संभव है। उन्होंने अपने-अपने तरीके आजमाए, लेकिन कोई भी धुएं को नाप नहीं सका। हर बार धुआं उनके हाथों से निकलकर उड़ जाता।

जब सभी दरबारियों ने हार मान ली, तब उनमें से एक बोला, “महाराज, हमें लगता है कि धुएं को नापा नहीं जा सकता। अगर तेनालीराम ऐसा कर पाए, तो हम उसे अपने से भी अधिक बुद्धिमान मान लेंगे।”

राजा मुस्कुराते हुए बोले, “क्यों तेनालीराम, क्या तुम तैयार हो?” तेनालीराम ने सिर झुकाते हुए कहा, “महाराज, मैंने हमेशा आपके आदेश का पालन किया है। इस बार भी करूंगा।”

इसके बाद तेनालीराम ने एक सेवक को बुलाया और उसके कान में कुछ कहा। सेवक शीशे की बनी दो हाथ लंबी नली लेकर दरबार में वापस आया। तेनालीराम ने उस नली का मुंह धूपबत्ती से निकलते धुएं पर लगा दिया। थोड़ी ही देर में नली धुएं से भर गई। तेनालीराम ने नली का मुंह कपड़े से बंद कर दिया और उसे राजा की ओर बढ़ाया, “महाराज, यह लीजिए दो हाथ धुआं।”

यह देखकर राजा मुस्कुराए और तेनाली की चतुराई की सराहना की। सभी दरबारियों ने शर्म से सिर झुका लिया। राजा ने कहा, “अब तो आप लोग समझ गए होंगे कि तेनालीराम की बराबरी करना संभव नहीं है।” सभी दरबारी चुपचाप सिर झुकाए खड़े रहे।

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों की बुद्धिमत्ता का सम्मान करना चाहिए और किसी की चतुराई से जलन नहीं करनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस कहानी का मुख्य संदेश है कि सच्ची बुद्धिमत्ता और चतुराई की पहचान और सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रश्न 2: राजा कृष्णदेव राय ने दरबारियों की परीक्षा क्यों ली?
उत्तर: राजा कृष्णदेव राय ने दरबारियों की परीक्षा इसलिए ली ताकि वे साबित कर सकें कि वे भी चतुर और बुद्धिमान हैं।

प्रश्न 3: तेनालीराम ने दो हाथ धुआं कैसे लाया?
उत्तर: तेनालीराम ने एक शीशे की नली का इस्तेमाल किया और उसे धूपबत्ती के धुएं से भर दिया, जिससे दो हाथ धुआं प्राप्त हो गया।

प्रश्न 4: दरबारियों ने धुआं नापने की कोशिश कैसे की?
उत्तर: दरबारियों ने अपने-अपने तरीके आजमाए, लेकिन धुआं हर बार उनके हाथों से निकलकर उड़ जाता।

प्रश्न 5: कहानी से हमें क्या सिखने को मिलता है?
उत्तर: कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि किसी की चतुराई और बुद्धिमत्ता की सराहना करनी चाहिए और उनसे जलन नहीं करनी चाहिए।

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